चाँदनी में हँसल करीला हम - कृष्णदेव प्रसाद गौड़ | Chandani Mein Hansal Karila Ham - Krishnadev Prasad Gaur

नाँव जेकर बहुत जपीला हम
ऊत गुमनाम हौ सुनीला हम
सिव कऽ दुर्गा कऽ पाठ का होई
नाँव मंत्री कऽ अब रटीला हम

जबसे देखली है रंग हम ओनकर
मन ओह रंग में रँगीला हम
छः रुपैया किलो मलाई हौ
नाम खाली रटल करीला हम

घिव कऽ नाहीं मिलत जलेबा हौ
चाह ओनके बदे धरीला हम
चाँद आवे ला जब घरे हमरे
चाँदनी में हँसल करीला हम

तू तऽ भइलऽ सिमेन्ट कऽ बोरिया
इंतिजारी में नित मरीला हम
अस फँसउलन कि का कहीं भयवा
ऊ चरावालंऽ औ चरीला हम

तू लड़ाई में पार का पइबऽ
राजनीति कऽ समर लड़ीला हम
लोग हमें कहऽलन 'बेढब' हौ
बात ढक कऽ मगर करीला हम



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