रानी हो अफसोस करऽ जनि अवकी राशन आवे दऽ । कूटे पीसे क झंझट छूटल अब साने भर क काम रही अइसन सरकार क किरिपा बा त एहू से आराम रही थोरे दिन अउरी सबुर' करऽ राशनमें आँटा पावे द । पहिले क बातें जाये द जब गाइ भँइस क दूध रहल पहिले क बातें जाये द जब हर एक ब…
हुकूमत के हाथी नियर दाँत दूगो दिखावे के दूसर, चवावे के दूसर उठल अस अहिंसा के झझकल झकोरा कि उंड़ गइले आन्ही में लन्दन के गोरा तऽ सपना सुनहरा में इम त्रस्त रहलीं आजादी के अचके में बाजल ढिढोरा खुललि आँखि लउकलि आजादी के झाँकी गरीबन के दूसर, अमीरन क…