भोजपुरी कविता

साहित्य रामायण से - श्री दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह | Sāhitya Rāmāyaṇa se - Shri Durgāshankar Prasād Singh

हरना के हरनी संगे चकवा के चकई संगे सारस साथ सारसी कपोत कपोतनी के नाचल खेलल खुनल है सलमेलि आ आपन भी तौ हंसै कुछ ओही नदी के हिलोर में नहात संगे सीता के लखन जब सिकार रहले खेलत दूर वन में ते सफेद धार नदी के लहरि में बहते जब रहे लहरत तवना पर रहे छहरल करिय…

गजल-रुबाई - श्री शिवप्रसाद 'किरण' | Gazhal-Rubāi - Shri Shivaprasad 'Kiraṇ'

कबहूँ कंगना कटार बन जाला कबहू पतझड़ बहार बन जाला आग लागेला जब पिरीतिया के छोटको रतिया पहाड़ बन जाला गीत हमनी रचीला सपना के कबहूँ सपनों सकार बन जाला मन के भँवरा के दोस काहे दीं रूप खुद ही शिकार बन जाला हमके देखीं न फेर के मुखड़ा कबहूँ धनिको भिखार बन ज…

बहार के दिन - श्री रामनाथ पाठक 'प्रणयी' | Bahaar Ke Din - Shri Ramnath Paathak 'Praṇayi'

डाले-डाल थिरिकेला फूल कचनार के कतना सुनर लागे दिनवा बहार के पकड़ी में टूसा लागल महुआ गुमाने पागल बरवा के बात में बजार बा - हजार के कतना... अमवा प भँवरा बहके कमवाँ प मनवाँ लहके अगिया लगावे चाल पछुवा बेयार के कतना... फर से लदरि गइले भुइयाँ सोहरि गइले ल…

अँजोरिया - श्री जगदीशचन्द्र मिश्र | Anjoria - Shri Jagadishchandra Mishra

उतरै उपारों से अँजोरिया मोर सिवनियाँ चमकै राम केकरे बेटवा क रक्खल बा दूध से भरल कटोरा चानी क चूरन के छोटे भुइयाँ भरि भरि झोरा नाचै-तलवा पर किरिनियाँ रात रनियाँ गमकै राम केकर सूखत बाटै सगरौं धोवलि उज्जर खादी धोबिन कवन अकास से लेइगै बादर चादर लादी कहवा…

वासन्ती बिरहा | Vāsanti Birha

रूप नाहीं दिहल कोइलिया के विधना लूँ, सोना में न दिहल सुवास । दोहना का कोखिया में मोतिया जनमली, कंटवा का गोदी में गुलाब ।। झुमका पहिरि झूमे, छोटकी महुलिया जे, गम-गम गमकेला बागि । सरदी बेदरदी ना बिरहिनि अंगना में हियरा में धन्हकेला आगि ।। अँचरा का तरे ग…

प्रार्थना - श्री मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' | Prārthnā - Shri Mukteshwar Tiwari 'Besudh'

बिनती इहे बराबर कर दऽ झोंटा दे के झाबर कइ दऽ । करिया गोर बराबर होखसु, सभके रंगि चितकाबर कइ दऽ ।। सभके एक समान बना दऽ डिह-डाबर खरिहान बना दऽ । सभके देखसु एक आँखि से- कमुनिस्टन के कान बना दऽ ।। प्रभुजी ! आपन कम हठ कइ दऽ हमरा मन के तू मठ कइ दऽ । जेकरा घ…

दूटि गइलीं - श्री कल्पनाथ चौबे | Tooti Gaili - Shri Kalpanath Chaube

कुँअना में पनियाँ गगरिया लेजुरिया, पियासल जाय; पनिघट से बटोहिया, पियासल जाय । घोड़वा चढ़ल आवै दूर से बटोहिया लटकै बगलिया में ढाल तरवरिया ओठवा सुखायल, बहै मथवा से पनियाँ, पियासल जाय । निहुरि के ढीलै धन कुँअना गगरिया चितवै बटोहिया के तिरछी नजरिया अपनै …

भिनसहरे - श्री 'नजीर' बनारसी | Bhinsahre - Shri 'Najeer' Banarasi

गरे में डाल के किरनन कै हार भिनसहरे ऊ रोज आवेलें गंगा के पार भिनसहरे परान दिहले भी केहू खरीद नाहीं सकत लगेला सुन्नरियन कै बजार भिनसहरे सुरुज की आड़ से निसदिन ई ताक-झाँक ताहार घरे से हमके लियावलाऽ यार भिनसहरे सरीर घाट पै डोलेला नाव की नाई रहेला मौज मे…

बाजे ले बँसुरिया - श्री सत्यनारायण केसरी 'सौरभ' | Baaje Le Bansuria - Shri Satyanarayaṇa Kesari 'Saurabh'

बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। अमवा मोजरवा के खोंसले कलंगिया । सेमर के फूल लाल, सखिया के अँगिया ।। गेनवा अनार कचनार नौरंगिया । बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। गोड़वा में घुघुरु बा कुलवा के धूरिया । पँखिया का ओढ़नी में सजली पतुरिया।। मखमल प चम चम, जर…

बैशाख - श्री विवेकी राय | Baishakh - Shri Viveki Rai

साल माथ घहराइल आइल खेती मुँह बइसाख कोड़ि कमा खाये वाला के दगलि सलामी लाख सुनहट गाँव उकाँव उठवले मनसायन खरिहान जहाँ पसेना के गाना बा अनधन बा भगवान ऊगल माहुर घाम पछिवहीं लूचि अगिनि के बान, दुपहरिया पाँतर में नाचलि बाँचल अबहीं प्रान । पानी भइल परान, पनिस…

गीत - श्री शिवशंकर मिश्र 'विनोद' | Geet - Shri Shivshankar Mishra 'Vinod'

उमड़लि आवे सुधि के बदरी रहि रहि बरिसे पानी । जिनिगी का खोंता में बइठल मन के चिरई रोवे नेहि डोरि से पँखिया बान्हल भार दरद के ढांवे नाचे लोर नयन के दरपन झलके पीर-कहानी। झाँझरि नइया परलि भँवर में डगमग - डगमग डोले हहर - हहर नदिया, पुरवैया सनन - सनन सन बोल…

तीन मुक्तक - श्री मुख्तार सिंह दीक्षित | Teen Muktak - Shri Mukhtar Singh Dixit

जवानी क इ पानी बा चढ़ल उतर जाई उमिर क चान बस चउथा पहर में ढर जाई कि जिनगी एक दिन पहुँची पड़ाव पर अपने उहाँ हर साँस जाके एक दम ठहर जाई X  X  X केहू से मन क बात बतावल ना जाला सपनों में आपन भरम गँवावल ना जाला जेवने में जाके पड़े दर्द क—परछाई दिल क शीशा क…

कुहुकलि कोयल - श्री लक्ष्मीशंकर त्रिवेदी | Kuhukali Koyal - Shri Lakshmishankar Trivedi

कुहुकलि कोयल भोर रे ! खुलल भोर के द्वार, उषा के बंसी बजल सजोर रे। कारी अधियारी रतिया में, मनवाँ बहुत डरायल। दूर देस में पिया बसेरा, पाती एक ना आयल। सुधि आवे जब-जब हियरा में, भरि-भरि आवे लोर र॥  बँसी बजल सजोर रे॥ रहि-रहि पलक कचहुँ लगि जावे, सपना में के…

रानी हो - श्री परमानन्द शुक्ल | Raani ho - Shri Paramānanda Shukla

रानी हो अफसोस करऽ जनि अवकी राशन आवे दऽ ।  कूटे पीसे क झंझट छूटल अब साने भर क काम रही अइसन सरकार क किरिपा बा त एहू से आराम रही थोरे दिन अउरी सबुर' करऽ राशनमें आँटा पावे द । पहिले क बातें जाये द जब गाइ भँइस क दूध रहल पहिले क बातें जाये द जब हर एक ब…

जिनगी एकर नाम - श्री नगेन्द्रनाथ भट्ट | Jinagi Ekar Naam - Shri Nagendranath Bhatt

फूल मन फुलाइ झाल लतरि बीच कली हँसल हवा सनसनाइ बहल भँवर गुनगुनाइ चलल एक फूल फुलल कबो, एक फूल झरल ! किरनि जरे राति ढरे अँखियन ले जोति भरे झटि बयारि ब‌ल्कि कबो दियना के प्रान हरे एक दिया जरल कबो, एक दिया बुझल ! भोर के अँजोर भइल चिरइन के शोर भइल साँझ भइल…

मधुमास - श्री अनिरुद्ध | Madhumas - Shri Aniruddha

ले पहुँचल सन्देस कोइलिया, आइल रे मधुमास । उतरल फागुन फूँक रहल बा, नया प्रान बगियन में मलल गुलाल गाल पर झलके, नरम छोट पतइन में लाल फुनुगिया-राधा, तरुवर काँधा के सँग रास । ले पहुँचल.... करिया मेघ कोइलिया कारी, समय-समय के दूत चमकल पलक आम मोजराइल, झूलल हर…

चौपदा : गीत - श्री शतानन्द उपाध्याय | Chaupada : Geet - Shrī Shatānanda Upādhyāya

नाहीं कुछ ऊ कहल जात बा  आ न कुछ ऊ सहल जात बा  उन कऽ एतना निसाना सधल  हमरे पर कुल लहल जात बा गीत बन-वन बोलेलै कोइलिया कि जैसे मोरे  मोरे मनवा कऽ पिरिया रिसाई हो केते दिन बितलें सपन मोरी अँखिया कऽ अँखिये में  गइलें - रिसाई - हो दिनवाँ - महिनवाँ, बरिसवा …

एक मुक्तक : एक गीत - श्री 'सरोजेश' गाजीपुरी | Ek Muktak : Ek Geet - Shri 'Sarojesh' Gajipuri

एक जवानी बहक गइल होत बात ई दूर तक गइल होत हम न होती  त आज पनघट पर  रस के गागर छलक गइल होत सावन अगराइल परदेसी घर आइल रे बदरा पर बदरा के करिया डोला डोलल गोरिया हुलसाइल वा मन के पपिहा बोलल धरती क बेटी हरिअर - हरिअर सारी में झूला झूलें झूमैं खेतवन के किया…

मधु पी ले रे — श्री रामवृक्ष राय 'विधुर' | Madhu Pi Le Re — Shri Ramvriksha Ray 'Vidhur'

अलि गाऊ मधुर - मधुर कुछ दिन बीत गइल पतझर के। झुलसल तरु विहँसल लागल फिनु पात नया रे पागल दुनियाँ के ई रीति हँसी कुम्हिलाई जे गिर - गिर के दिन... परल चरन केकर पावन बा उतरल सरग सुहावन बाँट रहल केदो के बा मधु के. घइला भर - भर के दिन... पागल मति मति तूँ बह…

एही अँगना - हरिराम द्विवेदी l Ehi Angna - Hariram Dwivedi

झुरुर झुरुर डोलै बयार एही अँगना, बान्हल अँचरवा फहरि परै । डार-डार जिनिगी कै डोले सपनवाँ  पात-पात विरमैला मुरहा परनवाँ  मोहिया के एतनी पसार एही अँगना, पारल कजरवा बहरि परै । अँखिया के कोरे बसी सँवरइया  लदरि-बदरि ओनई गझिन अमरईया  लुपुर-झुपुर झूलै बहार एह…

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