एक जवानी बहक गइल होत बात ई दूर तक गइल होत हम न होती त आज पनघट पर रस के गागर छलक गइल होत सावन अगराइल परदेसी घर आइल रे बदरा पर बदरा के करिया डोला डोलल गोरिया हुलसाइल वा मन के पपिहा बोलल धरती क बेटी हरिअर - हरिअर सारी में झूला झूलें झूमैं खेतवन के किया…