प्रेम कविता

एक मुक्तक : एक गीत - श्री 'सरोजेश' गाजीपुरी | Ek Muktak : Ek Geet - Shri 'Sarojesh' Gajipuri

एक जवानी बहक गइल होत बात ई दूर तक गइल होत हम न होती  त आज पनघट पर  रस के गागर छलक गइल होत सावन अगराइल परदेसी घर आइल रे बदरा पर बदरा के करिया डोला डोलल गोरिया हुलसाइल वा मन के पपिहा बोलल धरती क बेटी हरिअर - हरिअर सारी में झूला झूलें झूमैं खेतवन के किया…

बस में न देहिया, न बस में परनवाँ - राजेन्द्र प्रसाद अष्ठाना 'मधुकर' l Bas Mein Na Dehiya, Na Bas Mein Paranwa - Rajendra Prasad Ashthana 'Madhukar'

सुघिया के घिव परे, जरे मोर मनवाँ, रात दिन बेधेला पिरितिया के बनवाँ! काटे के दौरेला घरवा अँगनवाँ  बोलिया बोलेला देखि सगरो जमनवाँ ठारि अन्हरिया नजर के समनवाँ! दुनिया त रूसल सजनवाँ मनावे धरती अकसवा के देखि-देखि गावं जीयरा से चले नाहीं कवनो बहनवाँ  कसकि क…

जबले सनेहिया बा - जगदीश ओझा | Jabale Sanehiya Ba - Jagdish Ojha

ना जाने जे अँखिया में केतना ले लोर बा. प्यारी प्यारी अँखिया में कारी कारी पूतरी हो पलक का खोता जइसे झाँकेली कबूतरी हो जतने छलके भरि-भरि आवे ओतने ना जाने नयनवाँ में केतना हिलोर बा नन्हीं मुटी' जियरा के केतने अहेरिया हो करेले अहेरिया जे दिन दुपहरिया…

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