हमनी का गाँव सुधार करीं, तूँ मजा करऽ रजधानी में। तूँ लेके बोट हमनिये से, बँगला मे जा बइठ बड़का, हमरा मड़ई छावे खातिर, कंट्रोल करऽ मुँजवानी में। तोहरा मिलल आजादी के रस, हरिअर भइल बुढ़ापा बा, हमनी का जियते मुरदा अस लउकींजा भरल जवानी में। हम देखत-देखत …