धार्मिक कबिता

साहित्य रामायण से - श्री दुर्गाशंकर प्रसाद सिंह | Sāhitya Rāmāyaṇa se - Shri Durgāshankar Prasād Singh

हरना के हरनी संगे चकवा के चकई संगे सारस साथ सारसी कपोत कपोतनी के नाचल खेलल खुनल है सलमेलि आ आपन भी तौ हंसै कुछ ओही नदी के हिलोर में नहात संगे सीता के लखन जब सिकार रहले खेलत दूर वन में ते सफेद धार नदी के लहरि में बहते जब रहे लहरत तवना पर रहे छहरल करिय…

प्रार्थना - श्री मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' | Prārthnā - Shri Mukteshwar Tiwari 'Besudh'

बिनती इहे बराबर कर दऽ झोंटा दे के झाबर कइ दऽ । करिया गोर बराबर होखसु, सभके रंगि चितकाबर कइ दऽ ।। सभके एक समान बना दऽ डिह-डाबर खरिहान बना दऽ । सभके देखसु एक आँखि से- कमुनिस्टन के कान बना दऽ ।। प्रभुजी ! आपन कम हठ कइ दऽ हमरा मन के तू मठ कइ दऽ । जेकरा घ…

नाग नथैय्या - डॉ रामविचार पांडेय | Naag Nathaiyaa - Dr. Ramvichar Panday

नागिन कान्हा के समुझावे, काहे अइलऽ पानी में ? मानुस हऽ सूखला के प्रानी, पानी में अँऊजा जइबऽ पानी नाक-कान में ढूकी, लरुअइब, लँउजा जइबऽ  नागराज उठिहें, फुफुकरिहें, तन काँपी, भहरा जइबऽ  प्रान पखेरू उड़ि जड़हें, तू पानी पर छितरा जइबऽ  आल्हर बाड़ एही से फँ…

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