प्रेम

पीयर पीयर पीयरी में - मंगल मूर्ति 'मानव' | Mangal Murti 'Manav'

पीयर पीयर पीयरी में सजेली बहुरिया  जैसे नित खिलई कनइल क फूल  सुघर सुहाग रंग सजेला सलूका मोर  मन में लजाइ जाला - सेमरे क फूल बिंदिया हमार हउवइ सुरुज सलेहरी  कि जेसे सजना क मन उजियार सगरा क लहरा जस प्रेम क पहरुआ आगइ  जे के रोकई नाहीं रात - अँधियार  काले…

बदरिया घेरि अइले घनघोर - सतीश्वर सहाय वर्मा 'सतीश' | Badariya Gheri Aaile Ghanghor - Satishwar Sahay Verma 'Satish'

भींगल नयनवाँ के कोर हो  बदरिया घेरि अइले घनघोर ! तातल पनिया से धुआँ उठि अइले  छाई गइले अँखिया के बीच,  जेठवा से भंभुरल करेजवा के रहिया पर  छिलबिल भरि गइले कीच, पहिले असढ़वा में  छाड़ि दिहले घरवा में  तुरि के सनेहिया के डोर हो ! आधी - आधी रतिया के पिहक…

बलमुआ के याद - कन्हैया प्रसाद 'कुंज' | Balamua Ke Yaad - Kanhaiya Prasad Kunj

बलमुआ के याद हो सतावेला  करेजवा में टीस हो जगावेला ।  करिया बद‌रिया भयावन रतिया,  विरह वियोग से जले मोरे छतिया  नयनवाँ बरस के बुझावेला । रही - रही धीरे - धीरे पुरुवा डोले, दादुर मोर पपैया बोले,  बिजुरिया चमक के डरावेला ।   सुसुकी - सुसुकी हम करीला सवे…

बड़ तूँ धोखा देलू बनिके अनजान सजनी‌ - ‌राजबली दुबे 'तरल' | Bad Tu Dhokha Delu Banike Anjan Sajani - Rajbali Dubey 'Taral'

बड़ तूँ धोखा देलू बनिके अनजान सजनी ।  माटी के मन्दिर में बइठी, खाटी मीठी बोलऽ  हमके देखि मगन माटी में हँसि-हँसि नयना खोलऽ  हमके ठगि लिहलू तूँ बनिके मेहमान सजनी ।। बड़ ।।  एक दिन गये इनारा झाँकइ, देखि परल परछाँईं  बहुत दूर से हमेइ बोलइलू, छूटलि हमके झा…

पिया कहवाँ बिलमि गै - उमाशंकर तिवारी | Piya Kahawa Bilami Gay - Umashankar Tiwari

बेइला फुलै आधी रात हो, पिया क‌हवाँ बिलमि गै ।  कासे कहौं मन के बात हो, पिया कहवाँ बिलमि गै ।  पुरुबे से अइलें मयन ललछहियाँ  गावै लागी बिंदिया, हँसै लागि बहियाँ  कजरा त पुछते लजात हो, पिया कहवाँ बिलमि गै । मोरी बँसवरिया जोगिनियाँ के डेरा  बैरिनि पपिनिय…

आधी आधी रतिया में - महेंद्र कुमार 'निलम' | Aadhi Aadhi Ratiya Me - Mahendra Kumar 'Neelam'

आधी आधी रतिया में  गत्ते गत्ते मनवा कऽ रहि रहि डोले जब बयार सुधिया के अगना में लुकि छिपि सि‌हकेला  जाने काहे केहू कऽ पियार, नन्हकी पुतरियन में गंग जमुनि धावें  भेंटे के भरि अँकवार, बन्द एहि पिंजरवा में आकुल परान होलें  उड़ि जाए खातिर ओही पार ढ़हि ढि़म…

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