गीत

गीत - श्री शिवशंकर मिश्र 'विनोद' | Geet - Shri Shivshankar Mishra 'Vinod'

उमड़लि आवे सुधि के बदरी रहि रहि बरिसे पानी । जिनिगी का खोंता में बइठल मन के चिरई रोवे नेहि डोरि से पँखिया बान्हल भार दरद के ढांवे नाचे लोर नयन के दरपन झलके पीर-कहानी। झाँझरि नइया परलि भँवर में डगमग - डगमग डोले हहर - हहर नदिया, पुरवैया सनन - सनन सन बोल…

चौपदा : गीत - श्री शतानन्द उपाध्याय | Chaupada : Geet - Shrī Shatānanda Upādhyāya

नाहीं कुछ ऊ कहल जात बा  आ न कुछ ऊ सहल जात बा  उन कऽ एतना निसाना सधल  हमरे पर कुल लहल जात बा गीत बन-वन बोलेलै कोइलिया कि जैसे मोरे  मोरे मनवा कऽ पिरिया रिसाई हो केते दिन बितलें सपन मोरी अँखिया कऽ अँखिये में  गइलें - रिसाई - हो दिनवाँ - महिनवाँ, बरिसवा …

एक मुक्तक : एक गीत - श्री 'सरोजेश' गाजीपुरी | Ek Muktak : Ek Geet - Shri 'Sarojesh' Gajipuri

एक जवानी बहक गइल होत बात ई दूर तक गइल होत हम न होती  त आज पनघट पर  रस के गागर छलक गइल होत सावन अगराइल परदेसी घर आइल रे बदरा पर बदरा के करिया डोला डोलल गोरिया हुलसाइल वा मन के पपिहा बोलल धरती क बेटी हरिअर - हरिअर सारी में झूला झूलें झूमैं खेतवन के किया…

छलकल गगरिया मोर निर्मोहिया - गंगेश्वर पाण्डेय चंचल | Chalkal Gagariya Mor Nirmohiya - Gangeshwar Pandey 'Chanchal'

छलकल गगरिया मोर निर्मोहिया  छलकल गगरिया मोर । रहि रहि चँदनिया के चंदा निहारे  धई धई अँचरवा के कोर।  पनघट पपीहा पी-पी पुकारे  पियवा गइले कवनी ओर । निर्मोहिया, छलकल गगरिया मोर ।।  मोरवा के ठोरवा मोरिनिया देखावे,  भरि भरि कटोरवा में लोर ।  भँवरा भुलाइल क…

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