जिनगी प कबिता

गीत - श्री शिवशंकर मिश्र 'विनोद' | Geet - Shri Shivshankar Mishra 'Vinod'

उमड़लि आवे सुधि के बदरी रहि रहि बरिसे पानी । जिनिगी का खोंता में बइठल मन के चिरई रोवे नेहि डोरि से पँखिया बान्हल भार दरद के ढांवे नाचे लोर नयन के दरपन झलके पीर-कहानी। झाँझरि नइया परलि भँवर में डगमग - डगमग डोले हहर - हहर नदिया, पुरवैया सनन - सनन सन बोल…

तीन मुक्तक - श्री मुख्तार सिंह दीक्षित | Teen Muktak - Shri Mukhtar Singh Dixit

जवानी क इ पानी बा चढ़ल उतर जाई उमिर क चान बस चउथा पहर में ढर जाई कि जिनगी एक दिन पहुँची पड़ाव पर अपने उहाँ हर साँस जाके एक दम ठहर जाई X  X  X केहू से मन क बात बतावल ना जाला सपनों में आपन भरम गँवावल ना जाला जेवने में जाके पड़े दर्द क—परछाई दिल क शीशा क…

जिनगी एकर नाम - श्री नगेन्द्रनाथ भट्ट | Jinagi Ekar Naam - Shri Nagendranath Bhatt

फूल मन फुलाइ झाल लतरि बीच कली हँसल हवा सनसनाइ बहल भँवर गुनगुनाइ चलल एक फूल फुलल कबो, एक फूल झरल ! किरनि जरे राति ढरे अँखियन ले जोति भरे झटि बयारि ब‌ल्कि कबो दियना के प्रान हरे एक दिया जरल कबो, एक दिया बुझल ! भोर के अँजोर भइल चिरइन के शोर भइल साँझ भइल…

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