उमड़लि आवे सुधि के बदरी रहि रहि बरिसे पानी । जिनिगी का खोंता में बइठल मन के चिरई रोवे नेहि डोरि से पँखिया बान्हल भार दरद के ढांवे नाचे लोर नयन के दरपन झलके पीर-कहानी। झाँझरि नइया परलि भँवर में डगमग - डगमग डोले हहर - हहर नदिया, पुरवैया सनन - सनन सन बोल…