नेवता बलिबेदी क छोड़िके औरन क कबहू एंह आवत नाहीं मारू जुझारू बजें बजना केहू दूसर राग बजावत नाहीं छोड़ि के बीर भरी कविता रस दूसर में केहू गावत नाहीं छूरी-कटारी बिकै सगरो चुरिहारिन गाँव में आवत नाहीं जोतलि गइ तरुआरिन से भुइँ लोहुन के बदरा अरि अइलैं ता…