मुक्तक

तीन मुक्तक - चन्द्रशेखर मिश्र | Teen Muktak - Chandrashekhar Mishra

नेवता बलिबेदी क छोड़िके औरन क कबहू एंह आवत नाहीं मारू जुझारू बजें बजना केहू दूसर राग बजावत नाहीं  छोड़ि के बीर भरी कविता रस दूसर में केहू गावत नाहीं  छूरी-कटारी बिकै सगरो चुरिहारिन गाँव में आवत नाहीं जोतलि गइ तरुआरिन से भुइँ लोहुन के बदरा अरि अइलैं ता…

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