गाँव पर कबिता

बहार के दिन - श्री रामनाथ पाठक 'प्रणयी' | Bahaar Ke Din - Shri Ramnath Paathak 'Praṇayi'

डाले-डाल थिरिकेला फूल कचनार के कतना सुनर लागे दिनवा बहार के पकड़ी में टूसा लागल महुआ गुमाने पागल बरवा के बात में बजार बा - हजार के कतना... अमवा प भँवरा बहके कमवाँ प मनवाँ लहके अगिया लगावे चाल पछुवा बेयार के कतना... फर से लदरि गइले भुइयाँ सोहरि गइले ल…

वासन्ती बिरहा | Vāsanti Birha

रूप नाहीं दिहल कोइलिया के विधना लूँ, सोना में न दिहल सुवास । दोहना का कोखिया में मोतिया जनमली, कंटवा का गोदी में गुलाब ।। झुमका पहिरि झूमे, छोटकी महुलिया जे, गम-गम गमकेला बागि । सरदी बेदरदी ना बिरहिनि अंगना में हियरा में धन्हकेला आगि ।। अँचरा का तरे ग…

दूटि गइलीं - श्री कल्पनाथ चौबे | Tooti Gaili - Shri Kalpanath Chaube

कुँअना में पनियाँ गगरिया लेजुरिया, पियासल जाय; पनिघट से बटोहिया, पियासल जाय । घोड़वा चढ़ल आवै दूर से बटोहिया लटकै बगलिया में ढाल तरवरिया ओठवा सुखायल, बहै मथवा से पनियाँ, पियासल जाय । निहुरि के ढीलै धन कुँअना गगरिया चितवै बटोहिया के तिरछी नजरिया अपनै …

बाजे ले बँसुरिया - श्री सत्यनारायण केसरी 'सौरभ' | Baaje Le Bansuria - Shri Satyanarayaṇa Kesari 'Saurabh'

बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। अमवा मोजरवा के खोंसले कलंगिया । सेमर के फूल लाल, सखिया के अँगिया ।। गेनवा अनार कचनार नौरंगिया । बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। गोड़वा में घुघुरु बा कुलवा के धूरिया । पँखिया का ओढ़नी में सजली पतुरिया।। मखमल प चम चम, जर…

मधुमास - श्री अनिरुद्ध | Madhumas - Shri Aniruddha

ले पहुँचल सन्देस कोइलिया, आइल रे मधुमास । उतरल फागुन फूँक रहल बा, नया प्रान बगियन में मलल गुलाल गाल पर झलके, नरम छोट पतइन में लाल फुनुगिया-राधा, तरुवर काँधा के सँग रास । ले पहुँचल.... करिया मेघ कोइलिया कारी, समय-समय के दूत चमकल पलक आम मोजराइल, झूलल हर…

गाँव - भोलानाथ 'गहमरी' | Gaav - Bholanath 'Gahmari'

काँट - कूस से भरलि डगरिया, घरीं बचा के पाँव रे ।  माटी उपरा छान्ही छप्पर, ऊहे हमरो गाँव रे ॥ चान सुरुज जिनिकर रखवारा  माटी जिनिकर थाती,  लहरे खेतन बीच फसिलिया  देखि के लहरे ले छाती,  घर घर सबकर भूख मेटावे, नाहीं चाहे नाँव रे। ऊहे० चारूँ ओर सुहावन लागे…

लमहर सहरिया के | Lamahar Sahariya Ke | गाँव पे कविता

लमहर सहरिया के ऊँची अटरिया से डर लागे  अमवा का बगिया में ननकी मड़इया सुघर लागे अपना अटरिया से उतरे ली धनिया रंगलेली रंगवा से ठोर चारु ओरी चितवेली तिरछी नजरिया अँइठेली अंगुरी के पोर अपना झड़ोखवा से निरखे सजनवाँ बाँधेला पिरितिया के डोर अँखिया के बतिया क…

अब गाँवे में रहे के विचार बा - बलदेवप्रसाद श्रीवास्तव | Ab Gaaven Mein Rahe Ke Bichaar Ba - Baldev Prasad Srivastava

गँवई में रहनी त बकरी चरवनी  पोखरी में भगई में मछरी छनवनी  खेलनी महुइया पर ओल्हाव पाती  ओहिंजा भूतहवा ईनार बा अब गाँवे में रहे के बिचार बा... जातो बेजातो के चाचा भतीजा बाभन के कायथ पुकारेला जीया  कोइरी के कानू कहेला नू भइया रजपूत के धोवी ईयार बा अब गाँ…

ज़्यादा पोस्ट लोड करें
कोई परिणाम नहीं मिला