प्रकृति पर कबिता

बाजे ले बँसुरिया - श्री सत्यनारायण केसरी 'सौरभ' | Baaje Le Bansuria - Shri Satyanarayaṇa Kesari 'Saurabh'

बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। अमवा मोजरवा के खोंसले कलंगिया । सेमर के फूल लाल, सखिया के अँगिया ।। गेनवा अनार कचनार नौरंगिया । बनवा फगुनवा के बाजे बँसुरिया ।। गोड़वा में घुघुरु बा कुलवा के धूरिया । पँखिया का ओढ़नी में सजली पतुरिया।। मखमल प चम चम, जर…

बैशाख - श्री विवेकी राय | Baishakh - Shri Viveki Rai

साल माथ घहराइल आइल खेती मुँह बइसाख कोड़ि कमा खाये वाला के दगलि सलामी लाख सुनहट गाँव उकाँव उठवले मनसायन खरिहान जहाँ पसेना के गाना बा अनधन बा भगवान ऊगल माहुर घाम पछिवहीं लूचि अगिनि के बान, दुपहरिया पाँतर में नाचलि बाँचल अबहीं प्रान । पानी भइल परान, पनिस…

कुहुकलि कोयल - श्री लक्ष्मीशंकर त्रिवेदी | Kuhukali Koyal - Shri Lakshmishankar Trivedi

कुहुकलि कोयल भोर रे ! खुलल भोर के द्वार, उषा के बंसी बजल सजोर रे। कारी अधियारी रतिया में, मनवाँ बहुत डरायल। दूर देस में पिया बसेरा, पाती एक ना आयल। सुधि आवे जब-जब हियरा में, भरि-भरि आवे लोर र॥  बँसी बजल सजोर रे॥ रहि-रहि पलक कचहुँ लगि जावे, सपना में के…

चौपदा : गीत - श्री शतानन्द उपाध्याय | Chaupada : Geet - Shrī Shatānanda Upādhyāya

नाहीं कुछ ऊ कहल जात बा  आ न कुछ ऊ सहल जात बा  उन कऽ एतना निसाना सधल  हमरे पर कुल लहल जात बा गीत बन-वन बोलेलै कोइलिया कि जैसे मोरे  मोरे मनवा कऽ पिरिया रिसाई हो केते दिन बितलें सपन मोरी अँखिया कऽ अँखिये में  गइलें - रिसाई - हो दिनवाँ - महिनवाँ, बरिसवा …

एक मुक्तक : एक गीत - श्री 'सरोजेश' गाजीपुरी | Ek Muktak : Ek Geet - Shri 'Sarojesh' Gajipuri

एक जवानी बहक गइल होत बात ई दूर तक गइल होत हम न होती  त आज पनघट पर  रस के गागर छलक गइल होत सावन अगराइल परदेसी घर आइल रे बदरा पर बदरा के करिया डोला डोलल गोरिया हुलसाइल वा मन के पपिहा बोलल धरती क बेटी हरिअर - हरिअर सारी में झूला झूलें झूमैं खेतवन के किया…

मधु पी ले रे — श्री रामवृक्ष राय 'विधुर' | Madhu Pi Le Re — Shri Ramvriksha Ray 'Vidhur'

अलि गाऊ मधुर - मधुर कुछ दिन बीत गइल पतझर के। झुलसल तरु विहँसल लागल फिनु पात नया रे पागल दुनियाँ के ई रीति हँसी कुम्हिलाई जे गिर - गिर के दिन... परल चरन केकर पावन बा उतरल सरग सुहावन बाँट रहल केदो के बा मधु के. घइला भर - भर के दिन... पागल मति मति तूँ बह…

पवन खींचे अँचरा - श्रीकृष्ण तिवारी l Pawan Khinche Anchra - Shri Krishna Tiwari

आधी राति उगेला चनरमा हो रामा  पवन खिंचे अँचरा ! दूर बहे नदिया पियासलि अँखिया हाँफि - हाँफि उड़े मन खोलि दुनों पँखिया पलक - अँजुरि भरि मोतिया हो रामा सपन देला पहरा ! निबिया कि गँछिया प पसरे चननिया काँट अस चुभे अंग - अंग मे किरिनिया लिलरा प चमके बिजुरिय…

पराती - माधव पाण्डेय ' निर्मल ' | Paraati - Maadhav Pandey Nirmal

जाग हो गइल भोर रे मन-जाग हो गइल भोर  चिरइन के. कल-कल शोर रे मन जाग हो गइल भोर  पानी के बुल्ला नियर तारा बिलाइल गइल अन्हरिया दूर लाल पुरुब में फूल फुलाइल, लाल बादर कोर रे मन  लेके जम्हाई भले आँख गोरिया इहरि-सिहरि जाला देह  बहल मद मातल पवनवाँ गहुमा के द…

फागुन आइल हो ! - मदन मोहन सिनहा 'मनुज' l Phagun Aail Ho ! - Madan Mohan Sinha 'Manuj'

आजु होही एहवातिनि फागुन आइल हो राग मे जग बउराइल धरती रंगाइल हो हम बिरहा के मारल सुख हिय सालई हों  जनी मारई रंग के बान कि हम बन वासिनि हो कवना करनवाँ कुसुम फूले सरसो फुलाई झूमे हो कवना करनवाँ बवरि लागे बगिया अगराई गइले हो गमकेले देहिया मे नेहिया कि सुध…

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