गजल

नजरिया के बतिया नजरिया से कही द - दिनेश ' भ्रमर ' | Najariya ke Batiya Nazariya Se Kahi Da - Dinesh ' Bhramar '

रुवाई मन के बछरू छटक गइल कइसे,  नयन - गगरी ढरक गइल कइसे।  हम ना कहनी कुछ बयरिया से,  उनके अँचरा सरक गइल कइसे । गजल नजरिया के बतिया नजरिया से कहि द ।  ना चमके सोनहुला किनरिया से कहि द ।।  नयन में सवनवाँ बनल बाटे पाहुन,  सनेसवा जमुनिया बदरिया से कहि द ।…

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