बाल कविता

नाग नथैय्या - डॉ रामविचार पांडेय | Naag Nathaiyaa - Dr. Ramvichar Panday

नागिन कान्हा के समुझावे, काहे अइलऽ पानी में ? मानुस हऽ सूखला के प्रानी, पानी में अँऊजा जइबऽ पानी नाक-कान में ढूकी, लरुअइब, लँउजा जइबऽ  नागराज उठिहें, फुफुकरिहें, तन काँपी, भहरा जइबऽ  प्रान पखेरू उड़ि जड़हें, तू पानी पर छितरा जइबऽ  आल्हर बाड़ एही से फँ…

के के चली चान प ? - चितरंजन| Ke Ke Chali Chaan Pa ? - Chitranjan

चुन्नू मुन्नू एने आव हमरा के एगो बात बतावऽ के के चली चान पऽ, बतावजा ? चान पे रहेली एगो बुढ़िया माई  चाने अईसन बेटा हइस किसुन कन्हाई चलीं जा तनिक ओकरा से बतिआवे के ओल्हा-पाती खेले के इआरी लगावे के नदिया के तीरे-तीरे बछ़रु चरावेला  कदम बिरीछ तरे बँसिया …

ज़्यादा पोस्ट लोड करें
कोई परिणाम नहीं मिला