ऐ बुढ़िया नानी - महेंद्र शास्त्री | Budhiya Nani - Mahendra Shastri byutkarsh ऐ बुढ़िया नानी, अबहुँ बात मानीं । जाँत जाँत में पिसा-पिसा के मुअले बहुत परानी, अक्किल बुध से काम होखो छोड़ीं कुल्ही कहानी । ऊ चलिया अब चले ना पाई रोई चाहे कानी, दुनिया एक बनी, बन गइल कूदीं चाहे फानी ।। दल के दाल ना गलौ हमनी एगो हिन्दुस्तानी, मजहब…