मइली हो गइली चदरिया, हम का करी ? हमसे भइलीं ठगहरिया, हम का करी ? ई दुनिया अजगुत कै मेला देखे खातिर अइलीं । रंग-बिरंगी चकमक में हम आपन होश भुलइलीं । अगवाँ छ्वलसि अन्हरिया, हम का करी ? केवनी रसता चलीं तनिको ई हमके ना सूझै । गड़हन में गिरली तेवनो पर मनव…