प्रार्थना - श्री मुक्तेश्वर तिवारी 'बेसुध' | Prārthnā - Shri Mukteshwar Tiwari 'Besudh'

 बिनती इहे बराबर कर दऽ
झोंटा दे के झाबर कइ दऽ ।
करिया गोर बराबर होखसु,
सभके रंगि चितकाबर कइ दऽ ।।

सभके एक समान बना दऽ
डिह-डाबर खरिहान बना दऽ ।
सभके देखसु एक आँखि से-
कमुनिस्टन के कान बना दऽ ।।

प्रभुजी ! आपन कम हठ कइ दऽ
हमरा मन के तू मठ कइ दऽ ।
जेकरा घर में छत्तिस होखो
प्रभुजी जाके तिरसठ कइ दऽ ।।

अगते से अब दूना कइ दऽ
देखो सभे नमूना कइ दऽ ।
करिया कुच-कुच चेहरा रंगिके
उज्जर धप-धप चूना कइ दऽ ।।

जिनगी के हम खोढ़ा कह दीं
एह धरती के मोढ़ा कइ दीं।
दे दऽ जोर कलम में अइसन
सडंसे परवत लोढ़ा कइ दी ।।

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