मधु पी ले रे — श्री रामवृक्ष राय 'विधुर' | Madhu Pi Le Re — Shri Ramvriksha Ray 'Vidhur'
अलि गाऊ मधुर - मधुर कुछ दिन बीत गइल पतझर के। झुलसल तरु विहँसल लागल फिनु पात नया रे पागल दुनियाँ के ई रीति हँसी कुम्हिलाई जे गिर - गिर के दिन... परल चरन केकर पावन बा उतरल सरग सुहावन बाँट रहल…